FIFA का इतिहास एवं इससे जुड़ी कुछ खास बातें| Interesting facts & history of FIFA in hindi

FIFA ट्रॉफी से जुड़े रोचक तथ्य (Interesting Facts of FIFA World Cup Trophy in Hindi), FIFA का इतिहास क्या है? क़तर को फुटबॉल वर्ल्ड कप की मेजबानी देना एक बड़ी भूल थी, क़तर में होने वाले फीफा फुटबॉल विश्व कप पर बवाल

History of fifa

20 नवंबर 2022 का दिन मिडिल ईस्ट के देश क़तर के लिए एक ऐतिहासिक सौगात लेकर आने वाला है। 20 नवंबर से इस साल का फीफा वर्ल्ड कप आरंभ होने वाला है। क़तर इसकी मेजबानी करेगा। लेकिन इस बार इस विश्वकप को लेकर बवाल मचा हुआ है। इस ब्लॉग में हम इस विषय में पूरी जानकारी आपके साथ साझा करेंगे।   

पिछले दिनों फीफा के पूर्व अध्यक्ष सेप ब्लाटर (Sepp Blatter) ने यह बयान देकर चौंका दिया था की, क़तर को फुटबॉल वर्ल्ड कप की मेजबानी देना एक बड़ी भूल थी।” सबसे दिलचस्प बात यह है कि, क़तर की मेजबानी का ऐलान साल 2010 में सेप ब्लाटर (Sepp Blatter) ने ही किया था।

फीफा वर्ल्ड कप को दुनिया की सबसे बड़े और सबसे महंगे आयोजनों में माना जाता है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं की 2018 की फीफा वर्ल्ड कप फाइनल को 112 करोड़ लोगों ने टीवी पर लाइव देखा। ये दुनिया की कुल आबादी का लगभग 14% था। यानी ये इवेंट दुनिया के बड़े हिस्से को प्रभावित करता है। क़तर के आयोजन पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। क्योंकि ये ऐसे देश में हो रहा है जिसे इस तरह की खेल आयोजन का कोई अनुभव नहीं रहा है, और दूसरी तरफ़ उसके ऊपर तमाम तरह के मानवता विरोधी आरोप भी हैं। 

फीफा का इतिहास क्या है ?

तो आज हम जानेंगे फीफा की पूरी कहानी क्या है? फीफा वर्ल्ड कप 2022 की मेज़बानी क़तर को कैसे मिली और क़तर की मेजबानी को लेकर इतना बवाल क्यों मच रहा है?

FIFA World Cup Final 1908
FIFA World Cup Final 1908

आज हम फीफा वर्ल्ड कप की पूरी कहानी आपको बताने वाले हैं। चलिए हम जानते हैं इसकी शुरुआत कैसे हुई। ईसा के जन्म से करीब 200 बरस पहले की बात है। चीन में हुजू नाम के एक खेल का ज़िक्र मिलता है, इस खेल में लोग अपने पैरों का इस्तेमाल करके गेंद को नेट में पहुंचाते थे। इस खेल में हाथों का इस्तेमाल करना वर्जित होता था। इस खेल को पहले चीनी मिलिट्री ट्रेनिंग में इस्तेमाल किया जाता था। उसके बाद चीन में ही इस खेल का विकास हुआ। ये गेम खुले में नहीं खेला जाता था। उसे खेलने के लिए बड़े-बड़े कोट्स बनाए गए जिससे जूचांग कहा जाता था। इसमें छह कोणों में आधे चांद के आकार में गोल पोस्ट हुआ करते थे। 

फीफा की स्थापना ?

21 मई 1904 को 7 नेशनल एसोसिएशन ने मिलकर फीफा की स्थापना की। फीफा का फुल फॉर्म फ्रांसीसी भाषा से बना है, फेडरेशन इंटरनेशनल डे फुटबॉल एसोसिएशन (Fédération Internationale de Football Association). इस एसोसिएशन में सात देश शामिल हुए France, Belgium, Denmark, Netherlands, Spain, Sweden, और Switzerland. 

1904 से पहले फुटबॉल का इतिहास इसलिए नहीं बता रहे क्योंकि इस खेल और इसके नाम में बहुत कम कम समय में बदलाव हुए हैं। 

फीफा की स्थापना का एक मकसद ये भी था, की अमेरिका फुटबॉल को सर्वमान्य मान लिया गया था। वहीं रग्बी गेम का चलन भी बढ़ रहा था। दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी फुटबॉल खेली जा रही थी। लेकिन उसे इतनी अहमियत नहीं दी जा रही थी। फीफा के पहले अध्यक्ष रॉबर्ट गुएरिन (Robert Guérin) बने। फिर 1906 में डेनियल बर्ली वूलफॉल (Daniel Burley Woolfall) ने उनकी जगह ली।

फीफा का पहला टूर्नामेंट कब और कहाँ हुआ था?

साल 1908 में फीफा ने अपना पहला टूर्नामेंट लंदन में 1908 ओलंपिक के लिए आयोजित किया। इस आयोजन में दुनिया भर के लोग शामिल हुए। इसलिए फीफा की लोकप्रियता बढ़ी। जिसके कारण फीफा से दूसरे देश भी जुड़ना चाहते थे। 1909 में साउथ अफ्रीका, 1912 में अर्जेंटीना, 1913 में कनाडा और चिली, और 1914 में अमेरिका ने भी फीफा की सदस्यता ले ली।

अभी फीफा बड़े आयोजन नहीं कर रहा था। फीफा धीरे-धीरे फल फूल रहा था, की तभी दुनिया में संकट के बादल मंडराने लगे। 1914 में पहला विश्व युद्ध शुरू हो गया। इससे फीफा के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा। विश्व युद्ध के दौरान किसी भी तरह का आयोजन नहीं हुआ था। युद्ध खत्म होने के बाद फीफा की वापसी हुई।

पहला फीफा वर्ल्ड कप कब हुआ था ?

1930 में संगठन ने पहला वर्ल्ड कप आयोजित किया। उरुग्वे (Uruguay) में आयोजित इस टूर्नामेंट में 13 टीमों ने हिस्सा लिया। पहले विश्वकप को उरुग्वे (Uruguay) ने अपने नाम किया। तब से हर चार साल पर फुटबॉल वर्ल्ड कप आयोजित हो रहा है। सिर्फ 1942 और 1946 में दूसरे विश्व युद्ध के कारण वर्ल्ड कप का आयोजन नहीं हो पाया था। मौजूदा समय में वर्ल्ड कप की ट्रॉफी फ्रांस के पास है। उसने 2018 के फाइनल में क्रोएशिया (Croatia) को हराया था। 

फीफा की संरचना। 

फीफा के छह संघ हैं। ये दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों और इलाकों में संगठन का काम देखते हैं। यह क्षेत्र हैं, अफ्रीका, एशिया, यूरोप, नॉर्थ एंड सेंट्रल अमेरिका और दी कैरेबियन और साउथ अमेरिका। फीफा का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के ज्यूरिक (Zürich) में है। इसी वजह से इसे स्विट्जरलैंड के कानून के तहत काम करना होता है। दुनिया के 200 से ज्यादा फुटबॉल संघ फीफा के सदस्य हैं। इसके अलावा महिलाओं की 129 राष्ट्रीय टीमें भी इस संगठन से जुड़ी हुई हैं। फीफा दुनिया का सबसे अहम फुटबॉल संगठन है। लेकिन उसके पास अकेले दम पर खेल से जुड़े नियम तय करने का अधिकार नहीं है। ये काम इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड का है। फीफा स्पोर्ट का एक सदस्य मात्र है।

फीफा कांग्रेस क्या है ?

FIFA Congress
FIFA Congress
  • फीफा का सबसे अहम अंग है फीफा कांग्रेस।
  • इसमें सभी सदस्यों का प्रतिनिधित्व होता है।
  • कांग्रेस सालाना रिपोर्ट को अप्रूव करती है।
  • नई टीमों की एंट्री पर भी सारे फैसले फीफा कांग्रेस ही लेती हैं।
  • इसके अलावा कांग्रेस की बाकी अध्यक्ष जनरल सेक्रेटरी फीफा काउंसिल का भी चुनाव करती है।
  • फीफा काउंसिल को पहले फीफा एग्जीक्यूटिव कमेटी के नाम से जाना जाता था।
  • जब फीफा कांग्रेस का सत्र नहीं चल रहा होता है, तब यही कमेटी सारे फैसले लेती है।
  • एग्जीक्यूटिव कमेटी ही ये निर्णय लेती है की आगे आने वाले विश्वकप की मेजबानी किस देश को मिलेगी।

फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी कई मायनों में महत्वपूर्ण होती है। इस आयोजन के जरिए संबंधित देश को ग्लोबल स्तर पर अपनी पहचान बनाने का मौका मिलता है। फीफा वर्ल्ड कप देखने के लिए दुनिया भर के लोग आते हैं। टूरिज्म के क्षेत्र में कमाई बढ़ती है। इसके अलावा और भी कई तरह के राजनैतिक और आर्थिक फायदे मिलते हैं। इसी वजह से फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी को लेकर हर बार काफी टफ़ कॉम्पिटिशन रहता है। इसी मेजबानी के झगड़े ने 2015 में खेलों के इतिहास के अब तक के सबसे बड़े घोटाले को उजागर किया था। वो घटना क्या है ये भी हम जानेंगे। 

खेलों के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला (Scandle) क्या है ?

2 दिसंबर 2010 के दिन ज़्यूरिख़ के फिफा मुख्यालय में काफी गहमागहमी मची हुई थी। इस दिन 2018 और 2022 के लिए मेजबान देशों के नाम का ऐलान होने वाला था। इसमें दावेदारी पेश कर रहे देशों के गणमान्य लोग मौजूद थे। जिनमें ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन (David Cameron) और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बील क्लिंटन (Bill Clinton) से लेकर फुटबॉल स्टार डेविड बेखम (David Beckham) तक मौजूद थे। तय समय पर कार्यक्रम आरंभ हुआ। माना जा रहा था की 2018 की मेज़बानी इंग्लैंड और 2022 की मेज़बानी अमेरिका को मिलेगी। लेकिन कार्यक्रम में मौजूद सभी लोग तब आश्चर्यचकित हो गए, जब फीफा के उस समय के तत्कालीन प्रेसिडेंट सेप ब्लाटर (Sepp Blatter) ने लिफ़ाफ़े से रूस और क़तर का नाम बाहर निकाला। जिसमे रूस को 2018 और क़तर को 2022 की मेजबानी का अधिकार मिला। ये बेहद आश्चर्यजनक था। 

इस अनहोनी की तीन बड़ी वजह थी। 

  • रूस और क़तर पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगातार लग रहे थे। 2014 में क्रीमिया (Crimea) पर अवैध कब्जे के बाद पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंध लगा रहे थे। क़तर पर धार्मिक कट्टरता के आरोप लग रहे थे।
  • क़तर में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच में रहता है। क़तर को इससे पहले इतने बड़े स्तर के किसी भी आयोजन का अनुभव नहीं था। उनके यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम भी नहीं थे। दूसरी तरफ़ क़तर के पास ढंग की फुटबॉल टीम भी नहीं थी।  
  • क़तर खुले तौर पर समलैंगिकों का विरोध करता है। जबकि फीफा में शामिल कई, देशों में समलैंगिकता को संवैधानिक अधिकार मिले हुए हैं। खेल आयोजन के तौर पर फीफा भी खुले विचारों का समर्थन करता है। ऐसे में ये उनकी विचारधारा के बिल्कुल विपरीत था। 

दूसरे क़तर के नाम की घोषणा के बाद थोड़ा विरोध हुआ। कुछ दिनों के बाद मामला शांत पड़ गया। इसके कुछ सालों के बाद 2015 के जून महीने में अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ से फीफा के सात अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके कुछ ही घंटे बाद स्विट्जरलैंड में फीफा की मेजबानी को लेकर जांच होनी शुरू हो गई। शुरुआती जांच के बाद जस्टिस डिपार्टमेंट ने आरोप लगाया की मार्केटिंग एजेंसी ने ब्रॉडकास्ट अधिकार पाने के लिए 1200 करोड़ रुपये से अधिक की रकम घुस में दी। इसके बाद गिरफ्तारियों का सिलसिला ही शुरू हो गया।  इसी बीच फीफा का एक अधिकारी गवाही देने के लिए तैयार हो गया। चक ब्लेज़र (Chuck Blazer) को नार्थ अमेरिका में फुटबॉल बिज़नेस का गॉड फादर कहा जाता था। ब्लेज़र 1996 से 2013 तक फीफा के एक्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य रहे। इस नाते उनके पास मेजबानी के अधिकार के लिए वोट डालने का अधिकार था। उन्होंने 1998 में फ्रांस और 2010 में साउथ अफ्रीका के पक्ष में वोट डालने के एवज में पैसे लेने का आरोप स्वीकार कर लिया। दूसरी तरफ स्विस अधिकारी 2018 और 2022 की दावेदारी की जांच कर रहे थे। तत्कालीन फीफा उपाध्यक्ष सेप ब्लाटर (Sepp Blatter) पर दबाव बढ़ रहा था। उन्होंने बीच में ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके अलावा यूईएफए (UEFA) के अध्यक्ष मिशेल प्लाटिनी (Michel Platini) को भी अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। जाँच में और भी कई अधिकारियों को अपने लपेटे में लिया। फीफा उपाध्यक्ष सेप ब्लाटर (Sepp Blatter) को भी जाँच का हिस्सा बनाया गया। सेप ब्लाटर (Sepp Blatter)  पर 8 वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया। मार्च 2021 में ब्लाटर के प्रतिबंध को छह वर्ष के लिए और बढ़ा दिया गया। ब्लाटर 2027 तक फीफा की किसी भी गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकते हैं।

इस घटना ने फुटबॉल की दुनिया को शर्मसार किया था। लेकिन फीफा ने रूस और क़तर से मेजबानी छीनने की संभावना को सिरे से खारिज कर दीया। 2018 में रूस में आयोजन संपन्न हो चुका है। इस साल क़तर में टूर्नामेंट का आयोजन किया गया है।

क़तर के ऊपर किस तरह के आरोप लग रहे हैं ?

  • क़तर में मानव अधिकार को लेकर फिर एक बार बहस तेज हो चुकी है। इसी बहस में फीफा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
  • विश्व कप के आयोजन के लिए क़तर में आधारभूत संरचनाओं पर जोर दिया गया।
  • कई नए स्टेडियम तैयार  किये गये।
  • बाहर से आने वाले दर्शकों के लिए होटल्स भी बनाये गए।
  • लेकिन इस चमक के पीछे का सच अंधकार से भरा रहा। क़तर पर आरोप लगे की इन स्ट्रक्चर को बनाने वाले मजदूरों के साथ भी धोखेबाजी हुई। आरोप ये भी लगे की इन प्रोजेक्ट्स में काम करने के लिए जिन मजदूरों की भरती की गई है, उनसे बेवजह से मोटी फ़ीस वसूली गई। 
  • मजदूरों के अधिकारों का हनन। क़तर में 20 लाख से ज्यादा ऐसे लोग हैं जो दूसरे देशों से वहां काम करने आते हैं। जब फीफा ने 2022 विश्व कप की मेजबानी क़तर को सौंपी तो, इस बात पर कोई चर्चा नहीं हुई की तपते रेगिस्तान में खेल के लिए स्टेडियम होटल और दूसरे कंस्ट्रक्शन होंगे कैसे ? तब से लेकर अब तक बेशुमार ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिनमे मजदूरों के मानवाधिकार के हनन की बात कही गई है। कई केस ऐसे हैं जिनमें मजदूरों को उनकी मेहनत का पैसा नहीं दिया गया या कम पैसा दिया गया हो। मजदूरों को तय समय से बढ़कर काम करवाया गया। उन्हें उनका पैसा नहीं दिया गया। आरोप है की इस दौरान हजारों मजदूरों की मौत भी हुई लेकिन क़तर के अधिकारीयों ने इसकी कोई सुध तक नहीं ली। मजदूरों की मौत के बाद क़तर के कानून के मुताबिक उनके परिवारवालों को मुआवजा दिया जाना था। लेकिन उसमें भी गड़बड़ी के आरोप हैं। क़तर ने मजदूरों के अधिकारों के लिए कई रिफॉर्म्स की बात कही है। लेकिन इसके पुख्ता सबूत नहीं मिलते हैं। 

कफाला सिस्टम (Kafala system) क्या है ?

  • क़तर में कफाला सिस्टम (Kafala system) के तहत प्राइवेट कंपनी किसी प्रवासी मजदूर पर अपना अधिकार स्थापित कर सकती है। उससे अपनी मर्जी के मुताबिक काम ले सकती है। कफाला सिस्टम (Kafala System) ज्यादातर अरब देशों में चलन में है। सीधे शब्दों में कहे तो दूसरे देश से आकर यहां नौकरी करने वाले मजदूरों के पास उत्पीड़न से बचने का कोई रास्ता नहीं होता। कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से नौकरी नहीं छोड़ सकता। देश से बाहर जाने के लिए भी उन्हें अपनी कंपनी से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। अनुमति के बिना न तो नौकरी बदल सकते हैं और ना ही वापस जा सकते हैं। 
  • मजदूरी में कटौती और अवैध भरती फ़ीस। आसान भाषा में समझें तो जिन मजदूरों को क़तर में काम करने के लिए बुलाया गया था, और काम के एवज में जितना मेहनताना देने का वादा किया गया था। उन्हें उतना भी नहीं दिया जा रहा है। साथ ही विश्व कप के आयोजन के चलते क़तर में रोजगार मिलेगा, इसी अवसर को पाने के लिए कई देशों के लोग काम की तलाश में फर्जीवाड़े का शिकार हुए। काम की तलाश में  क़तर आने के लिए कई लोग एजेंट्स के जाल में फंसे। कई कंपनियों ने तो काम देने के लिए उनसे अवैध भर्ती फिस भी ली।
  • मजदूरों की मौत और प्रदर्शन। क़तर के एडवांस हेल्थ केयर सिस्टम के बावजूद वहां की सरकार मजदूरों की मौत पर कोई स्पष्ट डाटा पेश नहीं कर पाई है। जो डाटा मौजूद है वो बहुत कंफ्यूज करने वाला है। 2021 में दी गार्जियन  (The Guardian) में पब्लिश एक रिपोर्ट में बताया गया था की, 2010 से 2020 के बीच क़तर में रहने वाले साउथ एशियाई कंट्रीज के 6500 लोगों की मृत्यु हुई है। लेकिन सरकार ने इसका सिलसिलेवार ढंग से डाटा पेश नहीं किया। जैसे वे कहां काम करते थे। क्या काम करते थे, आदि। रिपोर्ट में ये भी सामने आया की इन मौतों में 69% लोग भारत नेपाल और बांग्लादेश से हैं। पिछले वर्षों में हुई मौतों की स्पष्ट रिपोर्ट भी सरकार पेश नहीं कर पाई है। क़तर की सरकार ने मजदूरों के प्रदर्शन पर रोक लगाई हुई है। साथ ही फरमान भी जारी किया है की कोई भी मजदूर किसी भी तरह की यूनियन ज्वाइन नहीं कर सकता है। 

फीफा में 1200 करोड़ की हेराफेरी का खुलासा 

साल 2011 में अमेरिका का इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (Internal Revenue Service) फीफा से जुड़े एक अधिकारी चक ब्लेज़र (Chuck Blazer) की जांच कर रहा था। आईआरएस (IRS) ने पाया की चक ब्लेज़र (Chuck Blazer) ने अपनी आय का टैक्स पे नहीं किया है। बाद में एफबीआई (FBI) भी जांच में शामिल हुआ। जब दोनों ने मिलकर जांच की तो भ्रष्टाचार के एक बड़े जाल का पता चला। इन एजेंसियों ने दुनिया भर के 33 देशों की पुलिस से संपर्क साधा। इस जाँच में सामने आया की फीफा के कई अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त थे।

साल 2015 में फीफा के 14 अधिकारियों को अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में आरोपित किया। इनमें से कई अधिकारियों को स्विट्जरलैंड में गिरफ्तार किया गया। और अमेरिका में प्रत्यारोपित कर इनपर केस चलाए गए। पता चला की इन लोगों ने 1200 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। इस हेराफेरी में अमेरिका के बैंक का ही इस्तेमाल किया गया है।

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मेरी राय

तमाम आरोपों से परे क़तर एक समृद्ध देश है। उसके पास नेचुरल गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। क़तर से ही अल जज़ीरा चैनल भी चलता है। ये मिडिल ईस्ट के सबसे प्रभावशाली मीडिया संगठनों में से एक है। दावा किया जा रहा है की क़तर फीफा वर्ल्ड कप का सफलतापूर्वक आयोजन पूरा कर लेगा। लेकिन अगर उसने इंसानों की बुनियादी अधिकारों पर गौर नहीं किया तो ये खेल के साथ-साथ इंसानियत की भी हार होगी। 

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Q. फीफा की स्थापना ?

Ans. 21 मई 1904 को 7 नेशनल एसोसिएशन ने मिलकर फीफा की स्थापना की। फीफा का फुल फॉर्म फ्रांसीसी भाषा से बना है, फेडरेशन इंटरनेशनल डे फुटबॉल एसोसिएशन (Fédération Internationale de Football Association). इस एसोसिएशन में सात देश शामिल हुए France, Belgium, Denmark, Netherlands, Spain, Sweden, और Switzerland. 

Q. फीफा का पहला टूर्नामेंट कब और कहाँ हुआ था?

Ans. साल 1908 में फीफा ने अपना पहला टूर्नामेंट लंदन में 1908 ओलंपिक के लिए आयोजित किया।

Q. पहला फीफा वर्ल्ड कप कब हुआ था ?

Ans. 1930 में संगठन ने पहला वर्ल्ड कप आयोजित किया। उरुग्वे (Uruguay) में आयोजित इस टूर्नामेंट में 13 टीमों ने हिस्सा लिया। पहले विश्वकप को उरुग्वे (Uruguay) ने अपने नाम किया।

Q. फीफा की संरचना?

Ans. फीफा के छह संघ हैं। ये दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों और इलाकों में संगठन का काम देखते हैं। यह क्षेत्र हैं, अफ्रीका, एशिया, यूरोप, नॉर्थ एंड सेंट्रल अमेरिका और दी कैरेबियन और साउथ अमेरिका।

Q. फीफा कांग्रेस क्या है ?

Ans. फीफा का सबसे अहम अंग है फीफा कांग्रेस।
इसमें सभी सदस्यों का प्रतिनिधित्व होता है।
कांग्रेस सालाना रिपोर्ट को अप्रूव करती है।
नई टीमों की एंट्री पर भी सारे फैसले फीफा कांग्रेस ही लेती हैं।
इसके अलावा कांग्रेस की बाकी अध्यक्ष जनरल सेक्रेटरी फीफा काउंसिल का भी चुनाव करती है।

Q. खेलों के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला (Scandle) क्या है ?

Ans. फीफा के एक्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य चक ब्लेज़र पर 1998 में फ्रांस और 2010 में साउथ अफ्रीका के पक्ष में वोट डालने के एवज में करोड़ रुपये से अधिक की रकम घुस लेने का आरोप साबित हुआ।

Q. क़तर के ऊपर किस तरह के आरोप लग रहे हैं ?

Ans. क़तर पर आरोप लगे की मजदूरों के साथ धोखेबाजी हुई। आरोप ये भी लगे की इन प्रोजेक्ट्स में काम करने के लिए जिन मजदूरों की भरती की गई है, उनसे बेवजह से मोटी फ़ीस वसूली गई। मजदूरों के अधिकारों का हनन। क़तर के एडवांस हेल्थ केयर सिस्टम के बावजूद वहां की सरकार मजदूरों की मौत पर कोई स्पष्ट डाटा पेश नहीं कर पाई है।

Q. कफाला सिस्टम (Kafala system) क्या है ?

Ans. क़तर में कफाला सिस्टम (Kafala system) के तहत प्राइवेट कंपनी किसी प्रवासी मजदूर पर अपना अधिकार स्थापित कर सकती है। उससे अपनी मर्जी के मुताबिक काम ले सकती है। कफाला सिस्टम (Kafala System) ज्यादातर अरब देशों में चलन में है।

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