कोरोना संकट: इतिहास के सबसे बुरे दौर में जापानी अर्थव्यवस्था

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जापान की अर्थव्यवस्था आधुनिक इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है. कोरोना वायरस की महामारी ने कारोबार को ठप कर दिया है और लोगों ने खर्च करना भी लगभग बंद कर दिया है.

अप्रैल-जून की तिमाही में जापान की जीडीपी में रिकॉर्ड 7.8 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई. ये देश के आधुनिक इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है.

इस स्थिति ने दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के नीतिनिर्माताओं पर ये दबाव बना दिया है कि देश को और ज़्यादा डूबने और लंबे वक़्त की मंदी से बचाया जाए.

अप्रैल-जून तिमाही में जापान की अर्थव्यवस्था में आधे से ज़्यादा योगदान देने वाली निजी खपत में 8.2 फ़ीसदी की गिरावट देखी गई. ये गिरावट विश्लेषकों के अनुमान (7.1फ़ीसदी) से कहीं ज़्यादा थी. इसके अलावा,सालाना निजी खपत में 56 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

जापान ने मई के आख़िर में आपातकाल हटा दिया था और इसके बाद ज़्यादातर कारोबार खुल गए थे. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल के आख़िर में हालात कितने सुधरेंगे, ये कोरोना महामारी की स्थिति पर निर्भर करेगा.

मिज़ुहो रिसर्च इंस्टिट्यूट में वरिष्ठ अर्थशास्त्री सैसुके सकाई ने कहा, “हमें उम्मीद है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में हमें दो अंकों में वृद्धि देखने को मिलेगी लेकिन अप्रैल-जून में जो नुक़सान हुआ है, उसकी ये मुश्किल से ही भरपाई कर पाएगा.”

उन्होंने कहा, “आशंका है कोरोना संकट के कारण जापान में आर्थिक गतिविधियां फिर से बाधित होंगी. हो सकता है कि कई बड़े देश फिर से लॉकडाउन लगाएं और जापान में भी एक बार फिर आपातकाल लग जाए.”

जापान के वित्त मंत्री यासुतोशी निशिमुरा ने एक बयान में कहा कि सरकार अर्थव्यस्था को पटरी पर लाने के लिए ‘लचीले और समय के अनुकूल’ कदम उठाएगी.

जीडीपी के आंकड़े जारी होने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हमें उम्मीद है कि जापान की अर्थव्यवस्था को ज़्यादा से ज़्यादा गति दे सकेंगे. अप्रैल-मई में जो नुक़सान हुआ अब वो घरेलू मांग बढ़ने के साथ रिकवरी की राह पर है.

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